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दोनों मुल्कों (India-Nepal) के प्रशासन ने मात्र आधे घंटे के लिए पुल खोला. इसी दौरान कमलेश तीन लोगों के साथ नेपाल के दार्चुला गये और आधे घंटे में शादी (Marriage) कर अपनी दुल्हनिया लेकर भारत लौट आए.

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में चीन बॉर्डर को जोड़ने वाली लिपुलेख सड़क के उद्धघाटन के बाद नेपाल सरकार (Nepal Government) लगातार ऐसे फैसले ले रही, जिससे दोनों मुल्कों में तनाव पैदा हो रहा है. बावजूद इसके ये भी सच है कि भारत-नेपाल (India-Nepal) की सांस्कृतिक विरासत सदियों से साझीदार रही हैं. खासकर बॉर्डर इलाकों में भले ही ये दो मुल्क हैं. लेकिन दोनों मुल्कों के बीच रिश्ते एक मुल्क की तरह ही हैं. यही वजह है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनातनी के बाद भी रोटी-बेटी के रिश्तों में कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है.

शादी के लिए खुलवाया इंटरनेशनल पुल

पिथौरागढ़ के जाजरदेवल के रहने वाले कमलेश मात्र तीन लोगों के साथ धारचूला के इंटरनेशनल झूला पुल से दार्चुला नेपाल गए और अपनी दुल्हनिया ले आए. असल में दोनों मुल्कों को जोड़ने वाला यह पुल 22 मार्च से कोरोना के चलते बंद है. सिर्फ विशेष मौकों पर ही इस पर आवाजाही हो पा रही है. कमलेश की शादी मार्च में नेपाल के दार्चुला में तय हुई थी. लेकिन लॉकडाउन के कारण शादी नहीं हो पाई. लंबे इंतजार के बाद दोनों परिवारों ने शादी का फैसला किया. कमलेश ने भारतीय प्रशासन से इंटरनेशनल झूला पुल खुलवाने की गुजारिश की थी. दोनों मुल्कों के बीच बातचीत में तय हुआ कि दोपहर 12 बजे मात्र आधे घंटे के लिए पुल खोला जाएगा. इसी दौरान कमलेश मात्र तीन लोगों के साथ नेपाल के दार्चुला पहुंचे और आधे घंटे में शादी कर भारत के धारचूला वापस लौट आए.

दोनों मुल्कों के प्रशासन को दिया धन्यवाद शादीशुदा जोड़े ने दोनों मुल्कों के प्रशासन को धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि भारत-नेपाल में रोटी-बेटी के रिश्ते यूं ही कायम रहेंगे.

एसएसबी इंस्पेक्टर दीपक चंद ने बताया कि पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से आधे घंटे के लिए पुल खोलने के निर्देश उन्हें मिला था. इसी दौरान कमलेश को शादी करने के लिए नेपाल भेजा गया और वो निर्धारित समय पर शादी करके अपनी दुल्हन के साथ भारत लौट आया.

उत्तराखंड के बॉर्डर इलाकों में सदियों से दोनों मुल्कों में घर जैसे रिश्ते रहे हैं. कमलेश की शादी ने तनाव के इस दौर में भी ये साबित कर दिया है कि कूटनीतिक रिश्तों पर इंसानी चाहत हमेशा भारी पड़ती है.



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