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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के संसदीय क्षेत्र में उनका ही दिया नारा ‘विकास बोलता है’ अब खोखला साबित हो रहा है.

आज़मगढ़. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के संसदीय क्षेत्र में उनका ही दिया नारा ‘विकास बोलता है’ अब खोखला साबित हो रहा है. ग्रामीण जनता की सुविधाओं के लिए दौड़ रही फाइलें सिस्टम के मकड़जाल में कही खो गयीं. लोग विकास की बात का इंतजार करते थक गए. आंखें पथरा गयीं. ऐसे में गांव की भोली-भाली जनता को समझ आने लगा कि राजनैतिक पार्टियां और उनके तंत्र से कुछ उम्मीद न की जाय तो बेहतर है. आजमगढ़ जिले में ग्रामीण जनता द्वारा खुद पुल का निर्माण कर यह दिखा दिया कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति व कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं होता.

आजमगढ़ जिले में शासन-प्रशासन द्वारा उपेक्षा का आलम यह है कि देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी पर बना अर्धनिर्मित पुल 14 साल से सरकार व अधिकारियों की अनदेखी के चलते अधूरा ही है. सालों से आवाज उठा रहे निराश व आक्रोशित ग्रामीणों ने खुद यह फैसला लिया कि इस पुल को हम मिलकर बनायेंगे और सरकार व नेताओं का सहारा नहीं लेंगे. ग्रामीणों ने लकड़ी के पुल का निर्माण कर लिया और उस पर आवागमन भी चालू हो गया. जिसके बाद ग्रामीणों ने उद्घाटन समारोह भी किया और मंदिर में जाकर दर्शन-पूजन किया. पुल बनने के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ उठी है.

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ग्रामीणों ने नदी पर बनाया बांस का पुल.

20 हजार की आबादी को जोड़ता पुलआजमगढ़ जिले के देवरांचल का यह पुल लगभग 20 हजार आबादी वाले गांवों को जोड़ता है. बाढ़ के बढ़ते प्रकोप के चलते लोगों को आने-जाने में काफी कठनाइयां होती हैं. इसको लेकर ग्रामीणों ने पुल नहीं तो वोट नहीं का नारा देते हुए राजनैतिक पार्टियों का बहिष्कार किया था, लेकिन अधिकारियों के समझाने  के बाद इन्होंने वोट दिया, लेकिन पुल निर्माण में जब कोई तेजी नही दिखी और ग्रामीण हर जगह चक्कर काट कर जब थक चुके तो स्वयं पुल का निर्माण करने का फैसाला कर लिया और सभी ग्रामीणों की मदद से आखिर पुल का निर्माण हो ही गया.



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