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मामला गुरुवार शाम (30 जुलाई) का है, जब प्रतापगढ़ (Pratapgarh) में सीओ पट्टी के कार्यालय में सीओ रमेशचंद्र को नौकरी से त्यागपत्र देने आसपुर देवसरा थाने में तैनात दीवान मिथिलेश मिश्रा पहुंच गया.

प्रतापगढ़. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ (Pratapgarh) में एक थाने में तैनात दीवान (हेड मोहर्रिर) मिथिलेश मिश्रा ने एसओ (SO) पर गंभीर आरोप लगा दिए, उसे सीओ के पास जाकर शिकायत की कि आसपुर देवसरा थाने के एसओ सुनील सिंह (SO Sunil Singh) पैसा लेकर एफआईआर लिखते हैं. क्रॉस एफआईआर में पैसा कमाते हैं. यही नहीं उसने आरोप लगाया कि एसओ उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित भी कर रहे हैं.  उसने मामले की जांच करने की मांग की. लेकिन जांच से पहले ही दीवान के लाइन हाजिर किए जाने का फरमान एसपी की तरफ से आ गया. बिना जांच के हुई इस कार्रवाई पर अब सवाल उठ रहे हैं.

सीओ के सामने लगाई गुहार तो मची खलबली

दरसअल मामला गुरुवार शाम (30 जुलाई) का है, जब सीओ पट्टी के कार्यालय में सीओ रमेशचंद्र को नौकरी से त्यागपत्र देने आसपुर देवसरा थाने में तैनात दीवान मिथिलेश मिश्रा पहुंच गया. यहां मिथिलेश ने सीओ के सामने एसओ आसपुर देवसरा सुनील कुमार सिंह पर हेड मोहर्रिर गंभीर आरोप लगाते हुए सेवामुक्त करने की गुहार लगा दी. दीवान के इस आरोप के बाद सीओ आफिस में खलबली मच गई.

आसपुर देवसरा थाने के हेड मोहर्रिर रमेश चंद्र ने एसओ सुनील सिंह पर प्रताड़ना और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. उसका कहना है कि पैसा लेकर मुकदमे में खेल किया जाता है. हेड मोहर्रिर ने मीडिया के सामने भी अपने बयान दिए. मिथिलेश ने कहा कि मैं बहुत परेशान हो चुका है, सीओ साहब के पास अपना इस्तीफा लेकर आया था. मैं अब इन परिस्थितियों में नौेकरी नहीं कर पाऊंगा.एसपी ने दीवान को किया लाइन हाजिर

वहीं मामले में मिथिलेश के आरोपों की बात तो दूर उलटा एसपी ने उसे ही लाइन हाजिर कर दिया. इस निर्णय के बाद पुलिस के अफसरों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि दीवान के आरोपों की जांच के बिना उस पर अनुशासनहीनता में एसपी ने कार्रवाई कर क्यों कर दी?

एसओ ने उलटे दीवान पर लगाए आरोप

आसपुर देवसरा एसओ ने भी दीवान पर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि पैसा लेकर हेडमोहर्रिर मुकदमा दर्ज करता है. थाने के काम न करने पर दबाव बनाता है. फिलहाल एसओ और हेडमोहर्रिर का आरोप-प्रत्यारोप जारी है.

उठे कई सवाल

इस प्रकरण में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. इसमें अगर हेड मोहर्रिर घूस लेता था, काम नहीं करता था तो आसपुर देवसरा एसओ सुनील सिंह ने अफसरों को मामला संज्ञान में लाकर कार्यवाई क्यों नही कराई? आरोप लगाने के बाद अफसरों ने आरोप लगाने वाले सिपाही के आरोप के जांच किये बिना ही कार्रवाई कर दी?



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