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पूर्वांचल और तराई में बहने वाली लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. शारदा, राप्ती और सरयू खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. शारदा नदी लखीमपुर खीरी के पलिया कला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

लखनऊ. पिछले दो-तीन दिनों में बारिश (Rain) में भले ही थोड़ी कमी देखने को मिली हो, लेकिन बाढ़ (Flood) का प्रकोप उत्तर प्रदेश में बढ़ता जा रहा है. 24 घंटे में 20 से ज्यादा और गांव टापू बन गए हैं. पूर्वांचल और तराई के जिलों के जिलों के 450 से ज्यादा गांव इन दिनों बाढ़ की मार झेल रहे हैं. इनमें से 100 गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह टापू बन गए हैं. इनका संपर्क बाकी इलाकों से कट गया है. यही वजह है कि इन गांव तक पहुंचने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है. 850 से ज्यादा नावें चलाई जा रही हैं. इनके जरिए बाढ़ ग्रस्त इलाकों तक राहत सामान और जरूरी चीजें पहुंचाई जा रही हैं.

राहत विभाग के मुताबिक प्रदेश के कुल 14 जिले बाढ़ की मार झेल रहे हैं. इनमें बाराबंकी, अयोध्या, कुशीनगर, गोरखपुर, मऊ, बहराइच, लखीमपुरखीरी, आजमगढ, गोंडा, बस्ती, संत कबीर नगर, सीतापुर, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर शामिल है. इन जिलों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग बाढ़ और जल भराव से सीधे प्रभावित हुए हैं.

लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर

पूर्वांचल और तराई में बहने वाली लगभग सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. शारदा, राप्ती और सरयू खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. शारदा नदी लखीमपुर खीरी के पलिया कला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. वहीं राप्ती गोरखपुर के बर्ड घाट और श्रावस्ती में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. सरयू बाराबंकी, अयोध्या और बलिया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. हालांकि सिंचाई विभाग के अनुसार नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आ रही है. बस्ती के सुपरीटेंडेंट इंजीनियर अवनीश साहू ने बताया कि बलरामपुर में राप्ती के जलस्तर में थोड़ी कमी आ रही है. हालांकि बस्ती में घाघरा के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है. उम्मीद यह है कि जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आएगी. इससे ततबंधों को थोड़ा खतरा पैदा होता है, लेकिन हमारे सभी तटबंध सुरक्षित हैं. बलरामपुर के कल्याणपुर में राप्ती की कटान को पूरी तरह रोक दिया गया है.बाढ़ से निपटने के लिए राहत विभाग की तैयारियां

पिछले 24 घंटे में राहत विभाग ने 16 हजार से ज्यादा फूड पैकेट बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच वितरित किया है. 96 बाढ़ शरणालय भी बनाए गए हैं. हालांकि अभी ऐसी कोई जरूरत नहीं पड़ी है कि बाढ़ शरणालयों में लोगों को रेस्क्यू कर के लाया जाए. 20 हजार मीटर से ज्यादा तिरपाल भी लोगों के बीच बांटे गए हैं. राहत विभाग को उम्मीद है कि मौसम ने साथ दिया तो अगले एक हफ्ते में बाढ़ और जलभराव की स्थिति से राहत मिल सकती है.

बता दें कि अगले चार-पांच दिनों के लिए मौसम विभाग ने जो अनुमान जारी किया है उसके मुताबिक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना नहीं है. हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई के कुछ और तराई के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की गुंजाइश बनी हुई है.



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