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सुपौल जिले (Supaul District) का एक ऐसा गांव जो हर साल खिसकता है. हर साल एक जगह से दूसरे जगह चला जाता है जिसके कारण लोगो को अपने ही गांव लौटने के लिए खोजना पड़ता है.

सुपौल. कोसी (Kosi) की गोद मे बसे सुपौल जिले का ऐसा गांव जो हर साल खिसकता रहता है. जी हां, सुनने में थोड़ा आश्चर्य भले ही लगता है पर हकीकत है कि कोसी के तटीय इलाकों में बसा गांव आज जहां है अगले साल वहां नहीं होता. कुछ दिन बाहर जाने के बाद दोबारा लौटकर गांव खोजना मुश्किल हो जाता है. अपने ही गांव को खोजने के लिए लोगों को पता पूछना पड़ता है. सुपौल से लगभग 60 किलोमीटर दूर मरौना प्रखंड (Marauna Block) का ऐसा ही गांव है खुखनाहा. यह गांव कोसी के गोद मे बसा है.  आबादी 500 से 700 के करीब है.  गांव में रहनेवालों की अपनी जमीन और अपनी खेती भी है पर हर साल गांव का भूगोल पूरी तरह बदल जाता है. आज कोसी के एक छोर पर है तो अगले साल पता नहीं कौन से कोने पर लोग होंगे उन्हें भी पता नहीं. दरअसल यह परेशानी कोसी के कटाव के कारण पैदा होती है.

कोसी के कटाव से गांव का बदल जाता है भूगोल

कोसी के तटवर्ती क्षेत्र में सुपौल, सहरसा, मधुबनी के three सौ से ज्यादा घर मौजूद हैं. यहां बसने वाले लाखों लोगों की जिंदगी कोसी के धार और उसकी दिशा पर निर्भर करती है. हर साल कोसी में आने वाले बाढ़ के कारण मुरौना प्रखंड का खुखनाहा गांव पूरी तरह कटकर खत्म हो जाता है. बाढ़ में कटाव के कारण गांव के लोग यहां से हटकर दूसरे जगह पर अपना आशियाना तैयार करने को मजबूर हो जाते हैं. पिछले कुछ सालों की बात करें तो खुखनाहा के साथ कई गांव का पता कई बार बदल चुका है.

केसी तटबंध के भीतर बसे गांवों के लोगों की बाढ़ और विस्थापन नीयति बन चुकी है.

लोगों को अपने घर जाने को पूछना पड़ता है पता

कोसी का कहर खुखनाहा जैसे गांव ऐसे पड़ता है कि कोसी जहां से गुजरती है वहां से गांव का पता भी बदल जाता है. जहां कोसी ने मिट्टी लाकर जमा किया वो टीला फिर से खुखनाहा के लोगों का पता बन जाती है. खुखनाहा निवासी सावित्री देवी का कहना है कि यहां की बहुएं बाढ़ से पहले कुछ महीनों के लिए अपने मायके चली जाती हैं तो वापस अपने ससुराल को खोजना मुश्किल हो जाता है. लोगो को अपने गांव तक पहुंचने के लिए पता पूछना पड़ता है. रोजगार या पढ़ाई के लिए बाहर गए लोगों को भी ऐसी ही परेशानी झेलनी पड़ती है. खुखनाहा के मुखिया प्रतिनिधि राजीव रंजन का कहना है कि यहां के लोगो के लिए यह जीवन का हिस्सा बन गया है. हर साल नया छत और नया पता इनके जिंदगी की नीयति बन गई है. लोग अपने घरों को फूस और बांस के बल्लियों से बनाते है ताकि बड़ा नुकसान  ना हो.



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