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जिस तरह से शराब (Liquor) के धंधेबाज नई-नई तरकीब से शराब की खेप को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं यह प्रशासनिक चौकसी पर सवाल खड़े करता है.

सासाराम. चेनारी में एक हार्वेस्टर मशीन (Harvester machine) के अंदर छिपाकर ले जा रहे 50 कार्टून से अधिक अंग्रेजी शराब बरामद किया गया है. बताया जाता है कि अचानक हार्वेस्टर मशीन में आग लग गई जिससे बाद धंधेबाज हार्वेस्टर को सड़क पर ही छोड़ कर भाग गए. ग्रामीणों की सूचना पर एनएचएआई के लोगों ने दमकल बुलाकर आग पर काबू पाया. जिस तरह से हार्वेस्टर मशीन में शराब छिपाकर ले जाया जा रहा था, यह अजीबोगरीब है. बता दें कि कृषि कार्य में हार्वेस्टर मशीन की उपयोगिता होती है, लेकिन शराब माफिया अब हार्वेस्टर मशीन को भी शराब की लोडिंग में इस्तेमाल कर रहे हैं. चेनारी के खुरमाबाद में NH-2 पर प्रशासन ने यह कार्रवाई करते हुए हार्वेस्टर को जब्त कर लिया है.

कृषि कार्य में उपयोग होता है हार्वेस्टर का
बता दें कि हार्वेस्टर का उपयोग कृषि कार्य में होता है. खासकर गेहूं की कटाई में इसका उपयोग होता है. लेकिन शराब माफियाओं ने बड़े ही इत्मिनान से हार्वेस्टर के अंदर जगह बनाकर शराब का कार्टून रखकर सप्लाई कर रहे थे. पुलिस तथा उत्पाद विभाग को चकमा देने के लिए शराब माफिया ने अपनी नई तरकीब के तरह यह प्रयोग किया. लेकिन चेनारी के खुरमाबाद में इसका भंडाफोड़ हो गया.

अचानक हार्वेस्टर में लगी आगप्रत्यक्षदर्शी प्रमोद कुमार बताते हैं कि चलती हुई हार्वेस्टर के एक किनारे में अचानक आग लग गई जिससे हार्वेस्टर चला रहे चालक तथा एक अन्य आदमी हार्वेस्टर को सड़क पर छोड़ कर भाग चला ग्रामीणों ने शोर मचाया तथा आग को बुझा दिया. इसी बीच एनएचएआई की टीम पहुंच गई तथा दमकल की गाड़ी को भी बुला लिया गया और हार्वेस्टर को जलने से बचा लिया गया. लेकिन जब देखा गया तो हार्वेस्टर में शराब भरी हुई थी. तब तक पुलिस की पहुंच गई और शराब की एक बड़ी खेप पकड़ी गई.

रोहतास में फल फूल रहा है शराब का धंधा
प्रतिबंध के बावजूद रोहतास जिला में अवैध रूप से शराब का धंधा चल रहा है. आए दिन शराब की बड़ी खेप पकड़ी जाती है. लेकिन फिर भी माफिया तंत्र मानने को तैयार नहीं है. चूंकि प्रशासन द्वारा माफियाओं पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से इन लोगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है. जाहिर है जिस तरह से शराब कारोबारी नई-नई तरकीब से शराब की खेप को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं. यह प्रशासनिक चौकसी पर सवाल खड़े करता है.



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