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सुपौल (Supaul) के निर्मली प्रखंड में बने अनुमंडलीय अस्पताल की स्थिति जानकर आप चौंक जाएंगे. इस अस्‍पताल का उद्घाटन 2014 में मंत्री विजेंद्र यादव (Vijendra Yadav) ने किया था, लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं हो सका है.

पटना. एक तरफ कोसी नदी के कारण सीमांचल में बाढ़ ( Flood in Seemanchal)और दूसरी तरफ कोरोना की मार है. सुपौल (Supaul) में कोसी के बढ़े जलस्तर के कारण कई प्रखंडों में बाढ़ आ गई है. जबकि कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण पहले ही क्षेत्र की हालत खराब है. अगर ऐसे में अनुमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल खुद आईसीयू में चला जाए तो क्या कहेंगे. जी हां, सुपौल जिले के निर्मली प्रखंड में बने अनुमंडलीय अस्पताल की स्थिति जानकर आप चौंक जाएंगे. हैरानी की बात ये है कि इस अस्‍पताल के उद्घाटन के 6 साल पूरे होने के बाद भी एक भी मरीज का इलाज नहीं को सका है.

2014 में मंत्री विजेंद्र यादव ने किया था उद्घाटन
निर्मली का अनुमंडलीय अस्पताल का उद्घाटन अक्टूबर 2014 में किया गया था. 5 करोड़ से ज्यादा की लागत से बने इस अनुमण्डलीय अस्पताल का उद्घाटन तत्कालीन वित्त और वाणिज्य मंत्री विजेंद्र यादव ने बड़ी धूमधाम से किया था. उद्घाटन समारोह में मंत्री के साथ स्थानीय विधायक अनिरुद्ध यादव भी मौजूद रहे थे. जबकि लोगों को बताया गया कि यह अस्‍पताल 75 बेड का होगा जो कि सीमांचल के लोगों की तकदीर बदल देगा

6 साल में एक मरीज का इलाज नहींनिर्मली के इस अस्पताल के उद्घाटन को आज 6 साल हो गए है, लेकिन हैरानी की बात है कि आज तक एक भी मरीज का इलाज नहीं हुआ है. सुनकर आश्चर्य होता है पर यह सच्चाई है कि इस अस्पताल में अभी तक ना तो एक भी बेड है और ना कर्मचारी, ना नर्स और ना ही कोई थर्मामीटर. 6 साल से उद्घाटन के बाद भी अस्पताल की ऐसी हालत पर कई सवाल खड़े होते हैं. निर्मली के रहने वाले स्थानीय निवासी विजय यादव का कहना है कि जब कोई सामान था ही नहीं, तो फिर इसका उद्घाटन क्यों किया गया. इसे उद्घाटन करने की क्या जल्दीबाजी थी. जबकि एक अन्‍य स्थानीय निवासी बबलू कुमार का कहना है कि जब अस्पताल का उद्घाटन हुआ था तो पीएचसी (PHC) से सारा सामान उठाकर लाया गया था. उद्घाटन के कुछ दिन बाद ही सारा सामान यहां से चला गया और अस्पताल खाली है.

लोगों को इलाज के लिए जाना पड़ता है पटना और दरभंगा
अनुमंडल स्तरीय निर्मली के इस अस्पताल के खस्ताहाल का नतीजा है कि निर्मली सहित पूरे अनुमंडल के लोगों को बेहतर इलाज के लिए दरभंगा के डीएमसीएच ( DMCH) या फिर पटना के पीएमसीएच (PMCH) जाना पड़ता है. आज कोरोना की वजह से जिले की स्थिति खराब है. यहां के अन्य अस्पताल में ना आइसोलेशन वार्ड है और न ही उचित संसाधन. आज अगर यह अस्पताल चल रहा होता तो ना सिर्फ कोरोना पीड़ितों बल्‍कि अन्‍य का भी बेहतर इलाज संभव हो पाता. देखने वाली बात होगी कि उद्घाटन के बाद भी संसाधनों की बाट जोहते इस अस्पताल में कब इलाज शुरू होगा.



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