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मुठभेड़ (Encounter) में शहीद हुए सिपाही सुल्तान सिंह वर्मा की पत्नी को 80 लाख का चेक यूपी सरकार की तरफ से दिया गया. वहीं प्रभारी मंत्री राम नरेश अग्निहोत्री ने 20 लाख रुपये शहीद सिपाही के पिता को सौंपा.

झांसी. कानपुर (Kanpur) के बिकरू गांव में eight पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार चल रहे ढाई लाख के इनामी बदमाश विकास दुबे (History Sheeter Vikas Dubey) की तलाश जारी है. इसी कड़ी में कानपुर में 2 जुलाई की रात पुलिस टीम पर हुए हमले में झांसी (Jhansi) के भोजला गांव निवासी सिपाही सुल्तान सिंह वर्मा के शहीद होने के बाद पत्नी व परिजनों में गुस्सा थम नहीं रहा है. शहीद की पत्नी ने कहा कि हत्यारे विकास दुबे की एनकाउंटर उसके सामने हो. क्योकि मैं खुद अपने हाथों से उसका खात्मा करना चाहती हूं. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस विभाग की मिली भगत से जघन्य हत्याएं हुई हैं. मुझे नहीं लगता कि विकास दुबे कभी पकड़ा जाएगा.

पत्नी ने बेबाक कहा कि विकास दुबे उनके पति का हत्यारा है. पकड़े जाने पर पुलिसवाले उसे गोलियों से भून डालें. उसने उनके पति ही नहीं बल्कि कई पुलिसकर्मियाें को बेखौफ होकर मौत के घाट उतारा है. उसे सजा नहीं बल्कि मौत मिलना चाहिए. अब तक उसकी गिरफ्तारी न होने के चलते पत्नी व परिजन निराश हैं. उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द पुलिस को उसे गिरफ्तार कर मौत की नींद सुला देना चाहिए. जब तक उसकी दर्दनाक मौत नहीं होती, तब तक पूरा परिवार चैन की नींद नहीं सो पाएगा.

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे से जुड़ा खुलासा, दूसरों के नाम से लाइसेंस बनवाकर जुटाता था असलहेमुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही सुल्तान सिंह वर्मा की पत्नी को 80 लाख का चेक यूपी सरकार की तरफ से दिया गया. वहीं प्रभारी मंत्री राम नरेश अग्निहोत्री ने 20 लाख रुपये का चेक शहीद सिपाही के पिता को सौंपा. उधर, सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार चल रहे मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) पर अब इनाम की राशि बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी गई है.

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बता दें इस बड़े हत्याकांड को अंजाम देकर फरार चल रहे विकास दुबे की गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. 40 थानों की फोर्स, एक हजार से अधिक दरोगा, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम उसकी चप्पे-चप्पे पर तलाश कर रही है. बावजूद उसके 72 घंटे से ज्यादा का वक्त गुजरने के बाद भी विकास दुबे और उसके गुर्गे पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं.


Published by:
naveen lal suri


First printed:
July 7, 2020, 2:57 PM IST



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