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इस मंदिर (Temple) के बारे में तीर्थ पुरोहित पंडित श्याम बिहारी मिश्रा बताते हैं कि अब मंदिर धीरे-धीरे जीर्ण शीर्ण हो गया है. लेकिन आज भी दीपावली और पितृपक्ष में बड़ी तादात में श्रद्धालु यहां आकर दीपदान करते हैं.
12 फीट लंबी मूर्ति
भीष्म पितामह के मंदिर के इस रहस्य को जानने के लिए न्यूज 18 की टीम इस मंदिर पहुंची. ये मंदिर आम तौर पर बंद ही रहता है. पंडित श्याम बिहारी मिश्रा के मुताबिक महाभारत का जब जिक्र आता है तब गंगापुत्र भीष्म पितामह को भी याद किया जाता है. लेकिन पूरी दुनिया में कहीं पर उनका कोई मंदिर नहीं है. सिर्फ और सिर्फ प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों ने हजारों साल पहले इस मंदिर की स्थापना की थी. इस मंदिर में 12 फीट लंबी मूर्ति स्थापित है जिसको तीरों की शैया पर स्थापित किया गया है.
दीपावली और पितृपक्ष में श्रद्धालु करते है दीपदानइस मंदिर के बारे में तीर्थ पुरोहित पंडित श्याम बिहारी मिश्रा बताते हैं कि अब मंदिर धीरे-धीरे जीर्ण शीर्ण हो गया है. लेकिन आज भी दीपावली और पितृपक्ष में बड़ी तादात में श्रद्धालु यहां आकर दीपदान करते हैं. इस मंदिर को प्रयागराज के धार्मिक पर्यटन सर्किट योजना में भी शामिल किया गया है. नागवासुकी मंदिर के साथ ही पांच करोड़ अस्सी लाख की लागत से नाग वासुकी मंदिर के साथ इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार होना है कि लेकिन आज तक नहीं हो पाया है.
तीरों की शैया पर लेटे पितामह
वहीं मंदिर के पुजारी से जब हमने तीरों की शैया पर लेटे पितामह के शरीर से अभी भी खून निकलने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में ऐसा कुछ भी नहीं है. हालांकि उन्होंने ये दावा जरुर किया है कि पहले कभी ऐसा होता रहा होगा.
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