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विकास दुबे (Vikas Dubey) ने अपने नौकर-नौकरानी से लेकर गुर्गों तक के कई फर्जी पहचान पत्र बनवा रखे थे. पुलिस को जांच में नौकर दयाशंकर और नौकरानी के अलग-अलग पहचान पत्र मिले हैं. इनका प्रयोग वह जमीन की खरीद-फरोख्त में करता था. पुलिस ने कई खाली राशन कार्ड और पार्टियों के झंडे, वायरलेस भी बरामद किए हैं.

कानपुर. उत्तर प्रदेश कानपुर (Kanpur) में eight पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार इनामी बदमाश विकास दुबे (Vikas Dubey) की तलाश में पूरे प्रदेश में छापेमारी चल रही है. इस दौरान कई खुलासे भी हो रहे हैं. अब पता चला है कि विकास दुबे दूसरों के नाम से असलहों का लाइसेंस (Weapon License) बनाता था और असलहे अपने यहां जुटाता था. विकास लोगों के लाइसेंसी असलहे अपने घर में रखता था. पता चला है कि उसने अपने नौकर दया शंकर के नाम से भी असलहे का लाइसेंस बनवा रखा था.

मोस्ट वांटेड विकास दुबे की जालसाजी का मामला आया सामने

यही नहीं उसने अपने नौकर-नौकरानी से लेकर गुर्गों तक के कई फर्जी पहचान पत्र बनवा रखे थे. पुलिस को जांच में नौकर दयाशंकर और नौकरानी के अलग-अलग पहचान पत्र मिले हैं. पता चला है कि इनका प्रयोग वह जमीन की खरीद-फरोख्त में करता था. पुलिस ने कई खाली राशन कार्ड और पार्टियों के झंडे, वायरलेस भी बरामद किए हैं.

बरामद ऑडी में खुलासावहीं कानपुर में ऑडी तीन गाड़ी लावारिस मिलने के मामले में पता चला है ये गाड़ी भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री के नाम निकली थी. प्रदेश मंत्री प्रमोद विश्वकर्मा ने न्यूज़ 18 से बात की और कहा कि उनका अपराधियों से कोई लेना-देना नहीं है. प्रमोद विश्वकर्मा ने कहा कि जय बाजपेई उनके क्षेत्र में रहता है. क्षेत्रीय लोगों के कहने की वजह से उन्होंने गाड़ी को फाइनेंस अपने नाम से करवाया था क्योंकि उनका सिविल खराब था. बाकी उनका कोई भी लेना-देना नहीं है. पुलिस को भी वह अपना बयान दे चुके हैं.

पुलिस की गिरफ्त में आया विकास दुबे का खजांची

उधर विकास दुबे की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम जगह-जगह ख़ाक छान रही है, लेकिन दुर्दांत अपराधी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं. इस बीच पुलिस और एसटीएफ लगातार उसके करीबियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. इसी क्रम में शनिवार को लावारिस मिली तीन लग्जरी गाड़ियों के मामले उठाए गए जय बाजपेई (Jai Bajpayi) का विकास दुबे से कनेक्शन मिला है.

काले धन से बीसी का खेल

पूछताछ में पता चला है कि जय बाजपेई विकास दुबे का खजांची था और उसी के पैसे से लोगों को बीसी खिलवाता था. इतना ही नहीं जय बाजपेई की लग्जरी गाड़ियों से ही विकास दुबे सफ़र करता था. कानपुर के विकरू कांड के बाद विकास दुबे ने अपने मोबाइल से डाटा डिलीट कर दिया था. लेकिन एक ऑडी, फोर्च्युनर और एक वर्ना कार लावारिस हालत में मिलने के बाद खुलासा हुआ कि गाड़ियां जय बाजपेई की है और उसका विकास दुबे से करीबी संबंध है. फिलाहल एसटीएफ लखनऊ लाकर उससे पूछताछ कर रही है.


Published by:
Ajayendra Rajan Shukla


First printed:
July 7, 2020, 12:14 PM IST



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