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लखनऊ. पूरा देश कोरोना (Coronavirus) के खात्मे की लड़ाई में जुटा हुआ है. आम हो या खास, सभी लोग अपने-अपने तरीके से इस जंग में जिम्मेदारी निभा रहे हैं. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्रोत्साहित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं कोविड-19 महामारी से उत्पन समस्याओं को दूर करने में बढ़-चढ़ कर योगदान दे रही हैं. न्यूज18 से खास बातचीत में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के मिशन निदेशक सुजीत कुमार (Sujeet Kumar) ने कोविड रिस्पॉन्स रणनीति के बारे में कुछ विचार साझा किए.

सवाल- महिला स्व-सहायता समूहों ने राज्य की COVID-19 के प्रभाव से रणनीति में कैसे योगदान दिया है.

मिशन निदेशक सुजीत कुमार ने बताया कि प्रदेश में गठित 3.5 लाख से अधिक समूहों में सम्मिलित 38 लाख महिलाएं कोविड आधारित विभिन्न गतिविधियों जैसे अपने सामुदायिक संगठनों में कोविड के संक्रमण को रोकने के लिए जागरूक करने से लेकर मास्क, सैनीटाईजर, पीपीई किट इत्यादि तैयार करने में मदद कर रही हैं.

सवाल- उनके संचालन का पैमाना और सफलता क्या है.यूपीएसआरएलएम के निदेशक कहते हैं कि ये समूह, सरकार के कोविड-19 प्रतिक्रिया के कुछ विशिष्ट तत्वों से जुड़े हैं. वे मास्क, पीपीई किट, सैनिटाइजर बना रही हैं. 75 जिलों के 19067 सदस्य अब हर दिन 20000 से अधिक मास्क बना रहे हैं. उनके उत्पादन आंकड़ों को देखकर हम समझ सकते हैं कि एसएचजी की कितनी बड़ी भूमिका होती है. अब तक 5119 से अधिक एसएचजी ने 88 लाख से अधिक मास्क, 45000 पीपीई किट और 1300 लीटर से अधिक सैनिटाइजर का उत्पादन किया है. कुमार ने बताया कि SHG सदस्य रेडियो पर प्रसारण के लिए ऑडियो संदेश बना कर जागरूकता सृजन अभियानों में भी योगदान दे रहे हैं.

सवाल- सरकार अपने प्रयासों में एसएचजी को कैसे जोड़ रही है और मदद कर रही है.

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के मिशन निदेशक सुजीत कुमार आगे बताते हैं कि सरकार निरंतर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं पर जागरूक करने एवं लक्षित परिवारों की पहुंच सुनिश्चित करने हेतु उनकी सहभागिता को सुनिश्चित किया जा रहा है. अपनी ओर से, खादी कपड़े के रूप में कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा हूं.

सवाल- ये एसएचजी महिलाओं और उनके समुदायों को कैसे सशक्त बना रहे हैं.

निदेशक के मुताबिक एसएचजी ने अपने संबंधित समुदायों में व्यवहार परिवर्तन संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. एसएचजी वित्तीय सशक्तीकरण के माध्यम से सदस्यों के जीवन में एक बड़ा परिवर्तन ला रही है. वे अब अपने परिवारों और समुदायों में रोल मॉडल हैं और अधिक से अधिक महिलाओं को कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

सवाल- आगे बढ़ते हुए, क्या समुदायों के कल्याण और विकास के लिए राज्य के SHG संस्थान का लाभ उठाने की योजना है.

सुजीत कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के हमारे अनुभव में हमने पाया है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में एसएचजी बहुत महत्वपूर्ण हैं और स्थानीय क्षमताओं को विकसित करने में भी मदद कर रहा हैं. महामारी के इस महत्वपूर्ण समय में एसएचजी के इन गुणों का उपयोग किया गया है और एसएचजी ने भी हमें निराश नहीं किया है.

मास्क और स्कूल ड्रेस बनाती महिलाएं

मास्क और स्कूल ड्रेस बनाती महिलाएं

सवाल- महिला सदस्यों के समूह ने किस प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त किया है, क्या कोई आय वृद्धि है. यदि हाँ, तो कितना.

उन्होंने बताया कि समूहों की महिलाओं द्वारा कोविड के अंतर्गत मास्क उत्पदान में four रु प्रति मास्क की आय, स्कूल ड्रेस सिलाई में रु 100 प्रति ड्रेस की आय, प्रेरणा पोषण वाटिका से औसतन रु 1500/- प्रति माह, समूहों की महिलाओं द्वारा बालिनी दुग्ध उत्पादक संस्था के माध्यम से 25000 किलो प्रति दिन का दुग्ध संकलन किया जा रहा है. जिसमें महिलाओं को औसतन 45 रु प्रति किलो की आमदनी हो रही है. ऐसे अनेक प्रयासों से महिलाओं की आजीविका में वृद्धि एवं लाभ हो रहा है.

सवाल- एसएचजी के सामने क्या चुनौतियां हैं और उसके लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं.

आजीविका मिशन (UPSRLM) के मिशन निदेशक सुजीत कुमार ने बताया कि कोविड के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के संसाधन घट जाने की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. मिशन द्वारा सरकार एवं निजी संस्थाओं के साथ सहभगिता कर रोजगार के विकल्प, नए रोजगार हेतु प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, तकनीकि सहयोग समूहों की महिलाओं को किया जा रहा है. प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट सखी को तैनात करने का प्रयास है.



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