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आपको बता दें, मेरठ को उस समय ‘मयराष्ट्र’ के नाम से जाना जाता था. मंदोदरी का विवाह (Marriage) रावण से होने के बाद से ही मेरठ रावण का ससुराल कहलाया जाता है.

अयोध्या. करीब 500 साल के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त को भूमि पूजन (Bhoomi Pujan) और राम मंदिर निर्माण (Ram Temple) के कार्य का शुभारंभ होने जा रहा है. इन सब के बीच ‘रावण का ससुराल’ कहे जाने वाले मेरठ से मिट्टी भेजी गई है. मेरठ (Meerut) के तीन पवित्र धार्मिक स्थलों की मिट्टी three कलशों में अयोध्या भेजी गई है. एक कलश में पवित्र तीर्थ स्थली गगोल की मिट्टी, दूसरे कलश में मेरठ के प्रसिद्ध औघड़नाथ मंदिर की मिट्टी, और तीसरे कलश में मेरठ के प्रसिद्ध बालाजी व शनि धाम की मिट्टी अयोध्या के लिए भेजी गई है. तीनों कलश में मिट्टी के साथ नवरत्न भी भेजे गए हैं. रावण की ससुराल से भेजी गई मिट्टी को लेकर मंदिर के पुजारी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.

मेरठ शहर को ‘रावण का ससुराल’ के रूप में भी जाना जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ है “रावण की पत्नी का घर”. माना जाता है यहां के मंदिर में पूजा करने के लिए रावण की पत्नी मंदोदरी आती थीं. मंदोदरी मय दानव की पुत्री थी. मंदोदरी की भक्ति भगवान शिव से जुड़ी हुई थी. जिनकी पूजा अर्चना करने के लिए मंदोदरी ‘बाबा श्री बिल्लेश्वर नाथ महादेव मंदिर‘ में आया करती थी. माना जाता है उनकी भक्ति से खुश होकर भगवान शिव ने दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा. आपको बता दें, मेरठ को उस समय ‘मयराष्ट्र’ के नाम से जाना जाता था. मंदोदरी का विवाह रावण से होने के बाद से ही मेरठ रावण का ससुराल कहलाया जाता है.

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मान्यता है कि गगोल तीर्थ पर ही श्रीराम के चरण पड़े थे. तभी दानवों का संहार हुआ था और मेरठ को उस श्राप से भी मुक्ति मिली थी. जब यहां आने पर ये कहा जाता था कि व्यक्ति की बुद्धि पलट जाती है. इसी गगोल तीर्थ पर आजकल 5 अगस्त की जोरदार तैयारियां चल रही हैं. पांच अगस्त को यहां दीपावली के पहले एक और दीपावली मनाई जाएगी.योगी सरकार ने अयोध्या के आधारभूत ढांचे, स्वरूप व विकास की तस्वीर बदलने की कार्ययोजना बनाई है. इसमें करीब 487 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों होगा. पीएम नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर भूमिपूजन के ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे.



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