अभिनंदन वर्धमान ने जॉइन की फ्लाई91, अब कमर्शियल पायलट के रूप में उड़ान भरेंगे

abhinandan varthaman fly91 commercial pilot

भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र सम्मानित अभिनंदन वर्धमान ने अपनी नई पारी शुरू कर दी है। 2019 में पाकिस्तान के साथ हवाई मुकाबले के दौरान दुश्मन के F-16 को मार गिराने वाले इस वायुवीर ने वायुसेना से रिटायरमेंट के बाद गोवा स्थित रीजनल एयरलाइन फ्लाई91 में पायलट के रूप में जॉइन कर लिया है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अगस्त में इस एयरलाइन के साथ काम शुरू किया।

अभिनंदन वर्धमान की नई भूमिका

अभिनंदन वर्धमान को 2019 के भारत-पाकिस्तान हवाई संघर्ष के नायक के रूप में जाना जाता है। तब वे विंग कमांडर थे। बाद में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोट किया गया।

अब वे कमर्शियल पायलट के रूप में फ्लाई91 के साथ जुड़े हैं। एयरलाइन ने कर्मचारियों की निजी जानकारी का हवाला देते हुए इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

2019 का हवाई संघर्ष और वीर चक्र

27 फरवरी 2019 को पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की बालाकोट एयर स्ट्राइक के जवाब में पाकिस्तान की तरफ से जवाबी कार्रवाई हुई। इस दौरान लाइन ऑफ कंट्रोल के ऊपर हवाई मुकाबला हुआ।

अभिनंदन वर्धमान मिग-21 बाइसन उड़ा रहे थे। उन्होंने पाकिस्तानी F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया। इसके कुछ ही पल बाद उनके विमान पर मिसाइल लगी और उन्हें इजेक्ट करना पड़ा।

वे पाकिस्तान में लगभग तीन दिन हिरासत में रहे। 1 मार्च 2019 को वाघा बॉर्डर पर उन्हें भारत वापस सौंप दिया गया।

इस असाधारण कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें 2021 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है।

फ्लाई91 के बारे में

फ्लाई91 एक रीजनल एयरलाइन है। इसने मार्च 2024 में वाणिज्यिक उड़ानें शुरू कीं।

वर्तमान में इसके पास छह एटीआर 72-600 विमान हैं। एयरलाइन के मुख्य केंद्र गोवा और हैदराबाद में हैं।

एयरलाइन का रुख

फ्लाई91 के प्रवक्ता ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी निजी मामला है। इसलिए उन्होंने इस विकास पर कोई टिप्पणी नहीं की।

अभिनंदन वर्धमान की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे वायुसेना के अनुभवी पायलट रिटायरमेंट के बाद सिविल एविएशन में नई जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

अभिनंदन वर्धमान का नाम अब सिर्फ सैन्य इतिहास तक सीमित नहीं रह गया है। अब वे यात्री विमानों के कॉकपिट में भी नजर आएंगे।