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बीते बुधवार को गोपालगंज और चंपारण (Gopalganj and Champaran) को जोड़ने वाली सत्तर घाट महासेतु (Sattar Ghat Bridge) से दो किलोमीटर पहले अप्रोच रोड ध्वस्त हो गया था.

गोपालगंज.  बीते 16 जून को सीएम नीतीश कुमार ने 264 करोड़ रुपए की लागत से गंडक नदी पर बना सत्‍तर घाट पुल (Sattar Ghat Bridge) का उद्घाटन किया था. इस स्थान से दो किलोमीटर दूर अप्रोच रोड (Approach Road) पर एक पुलिया भी थी. बुधवार को पानी के दबाव में इसी पुलिया के पास रोड ध्वस्त हो गया जिसको लेकर बिहार की सियासत में भी उबाल आ गया., इसे लेकर आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर थमा नहीं है और विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है. इस मामले में  एक तीन FIR करवाई गई है. आरोप ये है कि पहली प्राथमिकी उनपर है जिन्होंने बुधवार को कटाव निरोधी काम करने गए इंजीनियरों को जबरन रोक दिया था. दूसरी FIR वशिष्ठा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कराई है. जबकि तीसरी FIR बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से काम में बाधा पहुंचाने को लेकर दर्ज कराई गई है. डीएम अरशद अजीज ने इसकी पुष्टि भी की है.

हालांकि इस मामले में अब नया वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि लोग शांत खड़े हुए देख रहे हैं और पुलिया का अप्रोच रोड भरभरा कर गिरता जा रहा है. इस वीडियो को बिहार के एक वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत कुमार झा ने शेयर करते हुए लिखा है कि इसे आप स्वयं देखें और जज करें कि एफआईआर गलत है या सही?

बता दें कि बीते बुधवार को गोपालगंज और चंपारण को जोड़ने वाली सत्तर घाट महासेतु से दो किलोमीटर पहले अप्रोच रोड ध्वस्त हो गया था. जिसको लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने कार्य एजेंसी पर लापरवाही का आरोप लगाया था. अब सवाल ये उठाए जा रहे हैं कि जिस वशिष्ठा कंस्ट्रक्शन कम्पनी ने इस पुल का निर्माण किया और अप्रोच रोड बनवाया था उसपर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?इसी तरह जल संसाधन विभाग और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को क्यों बख्श दिया गया? बल्कि इसके उलट महासेतु के अप्रोच रोड के टूटने के बाद आम लोगों को या स्थानीय जनप्रतिनिधियो को ही निशाना बनाया गया है. जबकि अबतक पूरे मामले की जांच कराने की कोई बात नहीं की गयी है.



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