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वित्त सचिव अमित नेगी का कहना है कि सैलरी (Salary) का मामला सरकार (Uttarakhand Government) के संज्ञान में है. सभी विभागों को पैसे भेजे जा रहे हैं. कर्मचारियों (Employees) को जल्द ही सैलरी मिल जाएगी.

देहरादून. पीएम मोदी (PM Modi) ने ये आह्वान किया है कि कोरोनाकाल (Corona Crisis) में किसी को सैलरी (Salary) का संकट का न हो. लेकिन उत्तराखंड में निगम, मैनेजमेंट और आउटसोर्सिंग कर्मचारी पिछले 3 महीने से सैलरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. परिवहन निगम के 6500 कर्मचारी, उच्च शिक्षा विभाग में मैनेजमेंट के अधीन चल रहे एमकेपी पीजी कॉलेज के 70 कर्मचारी और महिला बाल विकास विभाग के 181 सेंटर में काम कर रहे कर्मचारी सैलरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वहीं गढ़वाल मंडल विकास निगम एफडी तोड़कर कर्मचारियों को वेतन दे रहा है.

सैलरी संकट के चलते जहां एमकेपी कॉलेज के शिक्षक कार्य बहिष्कार पर जाने की बात कर रहे हैं. वहीं रोडवेज के कर्मचारी बेड़े में शामिल हुई नई बसों को ही सरेंडर कराने की तैयारी में हैं. रोडवेज कर्मचारी यूनियन के महामंत्री दिनेश पंत का कहना है कि निगम में सालों से सैलरी का रोना जारी है. रिटायर हो जाने के बाद भी कर्मचारियों को ग्रैच्युटी की रकम के लिए जुझना पड़ता है.

जल्द सैलरी मिलने का भरोसा 

वित्त सचिव अमित नेगी बताते हैं कि सैलरी का मामला संज्ञान में है. सभी विभागों को पैसे भेजे जा रहे हैं. कर्मचारियों को जल्द ही सैलरी मिल जाएगी.गढ़वाल मंडल विकास निगम अपने कर्मचारियों को एफडी तोड़कर सैलरी दे रहा है. लेकिन बाकी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को कब तक अपनी मेहनत की कमाई के लिए संघर्ष करना होगा, फिलहाल कहना मुश्किल है.



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