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पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी यादव (Tejaswi yadav) हर रोज सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर ताबड़तोड़ हमले कर हैं. यही नहीं तेजस्वी सीधे सीधे नीतीश कुमार को अदृश्य बताते हैं.

पटना. जेडीयू नेता अजय आलोक (Ajay Alok) ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi yadav) पर अबतक का सबसे बड़ा हमला किया है. उन्होंने कहा कि तेजू बाबा भले ही अपने दामन पर लगे दाग को मिटाने के लिए RIN साबुन भी रगड़ लें पर दाग किसी कीमत पर नहीं धुलनेवाले. फिर चाहे क्यों ना तेजस्वी जी बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा कर लें या फिर बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत की नौटंकी कर लें. जनता के मन में यह धारणा (Perception) बन गया है कि तेजस्वी यादव एक भगोड़ा हैं जो आपदा आते ही कही भाग जाते हैं, या फिर कहीं लापता हो जाते हैं.

इसलिए हमलावर है जेडीयू

जेडीयू कुछ इस तरह से तेजस्वी यादव पर जुबानी हमला कर रही है तो इसके पीछे कुछ कारण भी है.  दरअसल पिछले कुछ दिनों से तेजस्वी हर रोज सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर ताबड़तोड़ हमले कर हैं. यही नहीं तेजस्वी सीधे सीधे नीतीश कुमार को अदृश्य बताते हैं. ऐसे में बौखलाई जेडीयू का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद पर लगे भगोड़े के दाग को धोना चाहते हैं और शायद यही कारण है कि कोरोना विस्फोट के खतरे और लॉकडाउन के बीच तेजस्वी बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे हैं.

बीजेपी भी जेडीयू के साथजेडीयू के साथ अब बीजेपी भी इस लड़ाई में कूद गई है. बीजेपी प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल का कहना है कि आपदा में हमेशा लापता रहनेवाले युवराज तेजस्वी की हर कोशिश उसी तरह से नाकाम हो जाएगी जैसे कि उनके पिता लालू यादव पर अब बिहार के लोगों का भरोसा टूट चुका है. जब लालू खुद पर लगे चारा घोटाले के दाग को अबतक ना धो पाए हों तो उनके बेटे तेजस्वी कहां से भगोड़ा का दाग धो पाएंगे?

तेजस्वी के बचाव में आरजेडी

वहीं अपने ‘युवराज’ के बचाव में उतरी आरजेडी ने कहा इस आपदा में कहां है नीतीश कुमार. आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि यह सरकार हर मोर्चे पर फेल हो गई है और तेजस्वी यादव सरकार की नाकामियों को उजागर कर रहे हैं तो सत्तारूढ़ पार्टी को पेट में दर्द हो रहा है. फिर आपदा में कौन लापता है ये सब देख रहे हैं. आज इस आपदा में ना तो मुख्यमंत्री दिख रहे हैं और ना ही डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी. फिर भी हमारे नेता पर सवाल उठाते हैं जो आज जरूरतमंद लोगों के बीच राहत बांट रहे हैं.

कहां पहुंचेगी सियासी लड़ाई?

बहरहाल मानसून के साथ-साथ बिहार में सियासी सीजन भी चालू है. ये तब तक रहेगा जब तक विधानसभा चुनाव न हो जाए. ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो चलता ही रहेगा. अब किसके दामन में कैसा दाग है और कितना दाग है, और ये दाग कैसे धुलेगा, इससे बिहार की जनता को कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन यह देखना दिलचस्प रहेगा कि आखिर दाग धोने-धुलवाने की ये सियासी लड़ाई कहां जाकर खत्म होती है.



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