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नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में जो अड़चन आती है उसे बिहार सरकार दूर करे. अब विलेज मार्केट तैयार करना सबसे बड़ा उद्देश्य है.

पटना. महात्मा गांधी सेतु  (Mahatma Gandhi Setu) के पश्चिमी लेन का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी  (Nitin Gadkari)  और सीएम नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) द्वारा उद्घाटन किए जाने के साथ ही बिहार वासियों को बड़ा तोहफा मिला है. तीन साल में बने इस पुल पर  शुक्रवार से वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है और उत्तर बिहार की करीब पांच करोड़ आबादी इससे लाभान्विति होगी. गांधी सेतु के ऑनलाइन उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, नित्यानंद राय के साथ बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव भी मौजूद रहे. इस मौके पर   नितिन गडकरी ने बिहार सरकार को आश्वसन दिया कि जो प्रस्ताव मिलेगा उसपर काम होगा और केंद्र की ओर से पैसे की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि बिना बिहार की प्रगति के बिना देश के विकास संभव नहीं.

सीएम नीतीश ने की ये मांग

इस अवसर पर सीएम नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री को धन्यवाद देते हुए कई सड़कों को 4 लेन बनाने का प्रस्ताव दिया. इनमें मोकामा-लखीसराय मार्ग को 4 लेन करने की बात कही. साथ ही  NH 28 मुजफ्फरपुर- बरौनी और NH 77 को भी 4 लेन बनाने की अपील की. इस पर नितिन गडकरी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में जो अड़चन आती है उसे बिहार सरकार दूर करे. अब विलेज मार्केट तैयार करना सबसे बड़ा उद्देश्य है. वहीं, जलमार्ग का विकास के बिना व्यापार का विकास संभव नहीं.  उन्होंने यह भी कहा कि जल्दी ही हवाई मार्ग की जगह पानी के मार्ग से पटना आऊंगा.

पुल की आयु है 100 वर्षलगभग three साल में बने इस सुपर स्ट्रक्चर (जो कि लोहा और स्टील का बना है) की आयु 100 साल बताई जा रही है. बता दें कि गांधी सेतु के जीर्णोद्धार का कार्य तीन साल पहले जुलाई, 2017 में शुरू हुआ था.
बरसात के बाद पूर्वी दो लेन के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ किया जाएगा. चारों लेन के पुनरुद्धार की अनुमानित लागत 1742.01 करोड़ रुपये है. इस पुल की डिजाइन लाइफ 100 वर्ष की है. सेतु के चारों लेन के पुनरुद्धार में कुल 66 हजार 360 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया जाना है. पूर्वी छोड़ के दो लेन के जीर्णोद्धार लिए आवश्यक स्टील में से आधी मात्रा की खरीद की जा चुकी है. पूर्वी लेन का जीर्णोद्धार कार्य 18 माह में पूरा कर लिया जाएगा. आने वाले दिनों में पुल के चारों लेन पर गाड़ियां फर्राटे भरने लगेंगी और नागरिकों को बड़ी सुविधा होगी.

हावड़ा ब्रिज जैसा डिजाइन
हावड़ा ब्रिज की तर्ज पर डिजाइन किए गए इस पुल के सभी पाए जहां पुराने कंक्रीट के बने हैं, वहीं पुल का सुपर स्ट्रक्चर लोहे का बना है. गौरतलब है कि पुल के जीर्णोद्वार कार्य के पूर्व आईआईटी रुड़की की टीम ने पुल के सभी पिलर को पूरी तरह मजबूत और सुदृढ़ पाया था. जीर्णोद्धार कार्य में ध्यान रखा गया कि पुराने पुल का मलबा गंगा में न गिरे.  पुराने पुल के सुपर स्ट्रक्चर के सारे मलवे को क्रश कर वैकल्पिक उपयोग किया गया.



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