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मृतक संजय के 10 साल के बेटे को होम क्वारेंटीन किया गया है. संजय ने मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अपनी मौत से पहले एक वीडियो बनाया था. इस वीडियो में उन्होंने मेडिकल कॉलेज झांसी (Medical College Jhansi) की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खामियों के बारे में जिक्र किया है.

झांसी. यह खबर उत्तर प्रदेश के झांसी (Jhansi) से है, जहां मेडिकल कॉलेज (Medical faculty) में बने कोविड- 19 अस्पताल में भर्ती कोरोना वायरस (Corona virus) से संक्रमित एक मरीज ने अपनी मौत से पहले खुद वीडियो (Video) बनाकर सोशल मीडिया में वायरस कर दिया. उसने वीडियो के माध्यम से यूपी की दम तोड़ रही स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी. झांसी के मउरानीपुर तहसील के रहने वाले संजय गेडा (Sanjay Geda) 15 दिन पहले कोरोना का इलाज कराने के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए थे. संजय की पत्नी और बेटी भी कोरोना संक्रमित थे, जिनका इलाज बरुआसागर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है.

मृतक संजय के 10 साल के बेटे को होम क्वारेंटीन किया गया है. संजय ने मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अपनी मौत से पहले एक वीडियो बनाया था. इस वीडियो में उन्होंने मेडिकल कॉलेज झांसी की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खामियों के बारे में जिक्र किया है. अब संजय के इस वायरल वीडियो ने सोचने पर मजबूर कर दिया है. अगर झांसी मेडिकल कॉलेज में ऐसे ही कोरोना मरीजों का इलाज होता है तो वहां से बच कर आना मतलब बड़ी भाग्य की बात है.

देखकर आपकी रूह कांप उठेगीसंजय का ये वीडियो देखकर आपकी रूह कांप उठेगी. अगर कोरोना का इलाज ऐसे ही हो रहा है तो मतलब साफ है कि मरीज संक्रमण से नहीं बल्कि लचर स्वास्थ सेवाओं के चलते मर रहे हैं. आपको बता दें कि झांसी की स्वास्थ व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने झांसी को दौरा भी किया था. ऐसे में अब सवाल उठना लाजमी है कि मुख्य सचिव ने वहां पर आखिर देखा क्या?

भ्रष्टाचार का झांसी मेडिकल कॉलेज
आपको जानकर हैरानी होगी कि झांसी मेडिकल कॉलेज में कोरोना का इंचार्ज डॉ अंशुल जैन को बनाया गया है. डॉ अंशुल बेहोशी का डॉक्टर हैं. इतना ही नहीं मेडिकल सूत्रों के अनुसार, डॉ अंशुल को रेडिलोजी विभाग का भी चार्ज दिया गया है. डॉ अंशुल अपना निजी डायग्नोस्टिक सेंटर भी चलते हैं. डॉ अंशुल का हाल ही में मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक की नियुक्ति हुई है. ऐसे में सवाल तो मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्या पर भी उठ रहे हैं, जिन्होंने कोरोना जैसी महामारी का नोडल ऐसी डॉक्टर को बना दिया जिसके दामन शुरू से ही विवादों में रहा है. आखिर ऐसी क्या मजबूरी है या कौन सा ऐसा मतलब है कि four दिन पहले मेडिकल कॉलेज में आये डॉ को इतने ज़िम्मेदारी वाले पद दे दिए गए.

दोषी के ऊपर होगी कार्रवाई
वहीं, इस मामले में CMO डॉ. जीके निगम का कहना है कि मामले की जानकारी हुई है. इस पूरे मामले की जांच करवाएंगे. जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई जरूर की जयेगी. यानी जांच में असल दोषी को बचा कर कमजोर पर कार्रवाई कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जाएगी. सही मायने में उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अनदेखी और लापरवाही प्रदेश सरकार की मंशा व मेहनत पर लगातार पानी फेरने का का कर रही है.



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