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UBSE Uttarakhand board consequence 2020: नैनीताल का दूरस्थ इलाका प्यूड़ा कम ही सुर्खियों में आता है.

हल्द्वानी. उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं के इंटरमीडिएट का रिज़ल्ट आते ही नैनीताल जिले के रामगढ़ का प्यूड़ा इलाका चर्चा में आ गया है. दरअसल यहां के डीएसएन राजकीय इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले युगल जोशी राज्य में सेकेंड टॉपर बने हैं. युगल ने 500 में से 477 नंबर के साथ 95.40 फ़ीसदी नंबर हासिल किए हैं. युगल को अंग्रेजी में 97, फिजिक्स में 99, कैमेस्ट्री में 92, गणित में 95 और बायोलॉजी में 94 नंबर मिले हैं. न्यूज़18 से बात करते हुए युगल जोशी अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपनी मम्मी मीना जोशी, पापा प्रकाश चंद्र जोशी के साथ ही अपने शिक्षकों को देते हैं. तीन भाई बहनों में बीच वाले युगल बताते हैं कि वे रोज़ पांच से छह घंटे की पढ़ाई करते थे. साथ ही खेल-कूद में भी हिस्सा लेते थे. लगातार पढ़ाई करने से उन्हें यह सफलता हासिल हुई.

शिक्षक बनने की तमन्ना 

राज्य में इंटरमीडिएट के दूसरे टॉपर युगल जोशी अपने पिता की तरह ही शिक्षक बनना चाहते हैं. उनके पिता प्रकाश चंद्र जोशी प्यूड़ा इंटर कॉलेज में ही गणित के शिक्षक हैं और योगेश भी पिता की राह पर ही चलना चाहते हैं. हालांकि उनकी योजना मेडिकल के लिए नीट देने की भी है लेकिन दिल से वे शिक्षक ही बनना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने बीएससी करने का मन बनाया है.

डीएसएन राजकीय इंटर कॉलेज प्यूड़ा के प्रिंसिपल बालमुकुंद तिवारी बताते हैं कि युगल शुरुआत से ही बेहद अनुशासित स्टूडेंट रहा है. तिवारी कहते हैं कि उसकी प्रतिभा देख हमें भरोसा था कि वह बोर्ड परीक्षा में बेहतर करेगा लेकिन उसने राज्य में दूसरा स्थान लाकर स्कूल के साथ ही इलाके का नाम भी रोशन कर दिया.

प्रिंसिपल कहते हैं कि 10वीं में भी युगल जोशी राज्य के छठे टॉपर रहे थे. इसके साथ ही युगल स्कूल का प्रतिनिधित्व कई विज्ञान से जुड़ी इंटर-स्कूल प्रतियोगिताओं में करते रहे हैं. इनमें उन्होंने कई बार पुरस्कार भी जीते हैं.

इलाके के लिए रोल मॉडल बने युगल

प्यूड़ा को नैनीताल जिले का दूरस्थ इलाका माना जाता है. नैनीताल-अल्मोड़ा जिले के बॉर्डर के करीब पड़ने वाला यह इलाका कम ही सुर्खियों में आता है. इसलिए भी आस-पास के लोग युगल जोशी की सफलता से खासे खुश हैं.

इलाके के रहने वाले बीजेपी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता चंदन बिष्ट  कहते हैं कि युगल जोशी प्यूड़ा के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं क्योंकि उनकी सफलता ने साबित किया है कि प्रतिभाएं किसी चीज की मोहताज नहीं होती. अगर प्रतिभा है तो वह निखर कर सामने आएगी, उसे कोई नहीं रोक सकता.



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