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लखनऊ. कानपुर (Kanpur) में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से फरार चल रहा पांच लाख का इनामी विकास दुबे (Vikas Dubey) सातवें दिन उज्जैन (Ujjain) के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से गिरफ्तार (Arrest) हुआ. पुलिस फरीदाबाद से लेकर एनसीआर में उसे खोजती रही और शातिर बदमाश विकास उज्जैन पहुंच गया. इस बीच बड़े शातिराना अंदाज में उसने अपनी गिरफ़्तारी दी. या यूं कहें उसने सरेंडर ही किया. कानपुर कांड के मुख्‍य आरोपी विकास दुबे से मिले दस्‍तावेजों में ग्वालियर का मिला एड्रेस मिला है. फर्जी दस्तावेज में उसका नाम शुभम दर्ज है. यूपी STF सड़क मार्ग से मध्य प्रदेश से निकली है.

पढ़ें लाइव अपडेट्स:-

>>विकास दुबे की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल लाया गया है. यहां पोस्टमार्टम से पहले उसका कोरोना टेस्ट किया जाएगा. डॉक्टरों के मुताबिक, उसे चार गोलियां लगी हैं. एक गोली सीने पर भी लगी है.

क्यों काटा शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा का पैर
विकास दुबे ने शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा के बारे में बताया कि मेरी उससे नहीं बनती थी. कई बार वो मुझसे देख लेने की धमकी दे चुके थे. पहले भी बहस हो चुकी थी. जबकि विनय तिवारी ने भी बताया था कि सीओ तुम्हारे खिलाफ है. इस वजह से मुझे सीओ पर गुस्‍सा था. साथ ही कहा कि सीओ को घर के सामने के मकान में मारा गया था.

विकास ने कहा कि हालांकि सीओ को मैंने नहीं बल्कि मेरे साथियों ने आहाते से मामा के मकान में कूदकर आंगन में मारा था. इस दौरान उसके एक पैर पर भी वार किया गया था, क्‍योंकि मुझे पता चला था कि वो बोलता है कि विकास का एक पैर गड़बड़ है, दूसरा भी सही कर दूंगा. सीओ का गला नहीं काटा था, गोली पास से सिर में मारी गयी थी इसलिए आधा चेहरा फट गया था.

जानकारी के मुताबिक गैंगस्‍टर विकास दुबे ने कबूल किया है कि घटना के बाद घर के ठीक बगल में बने कुए के पास पांच पुलिसवालों की लाशों को एक दूसरे के ऊपर रखा गया था जिससे उनमें आग लगा कर सबूत नष्ट कर दिये जाएं.



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